ज़ियारत ए नहिया की प्रार्थना में कहा जाता है:
या हुसैन इब्ना अली, या इब्ना रसूलिल्लाह, या خليفة रसूलिल्लाह, या حجة अल्लाह,
ज़ियारत ए नहिया शिया मुस्लिमों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण परंपरा है। यह प्रार्थना हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद में की जाती है और उनके परिवार और साथियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करने के लिए की जाती है।
ज़ारतनाकुम ज़ारतन लिल्ज़ालिमीन, व इनना लिल्ज़ालिमीन लज़ूमिय्यतुन, फलीक़तन व दम़िय्यतुन, व लकम इला अल्लाह रिज़वानुन,
Ziyarat E Nahiya In Hindi 〈2024〉
ज़ियारत ए नहिया की प्रार्थना में कहा जाता है:
या हुसैन इब्ना अली, या इब्ना रसूलिल्लाह, या خليفة रसूलिल्लाह, या حجة अल्लाह,
ज़ियारत ए नहिया शिया मुस्लिमों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण परंपरा है। यह प्रार्थना हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद में की जाती है और उनके परिवार और साथियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करने के लिए की जाती है।
ज़ारतनाकुम ज़ारतन लिल्ज़ालिमीन, व इनना लिल्ज़ालिमीन लज़ूमिय्यतुन, फलीक़तन व दम़िय्यतुन, व लकम इला अल्लाह रिज़वानुन,